Wednesday 15 March 2017

फिर से-44

अंतस मे कैसे उग आया,
प्रणय भाव का द्वीप फिर से।
कुछ तो कहना चाहें लहरें,
आ आ कर के समीप फिर से।।
दूर तलक ना कोई किनारा,
फिर भी लगे ज्यों कोई पुकारा,
इसी भ्रम मे जल उठते हैं,
तूफानो मे भी दीप फिर से।
                    -विजय वर्मा
                   (फिर से-44)
                  15-03-2017

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