Saturday 25 February 2017

फिर से

जुनून जूझने का मुश्किलों से,
चाहता हूँ आजमाना फिर से।
फिर से दो चार हाथ हो जाये;
सामने हूँ आ जमाना फिर से।।
तेरी तरकीब सीख आया हूँ,
नये साँचे मे ढल के आया हूँ।
पलट के रख दूँ तेरे दाँव सभी,
तू भी कहना आज माना फिर से।
                    -विजय वर्मा
                    (फिर से-41)
                   25-02-2017

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