Friday, July 17, 2015

चाहत नही बदली

हर शक्स है बदहाल सा,हालत नही बदली।
बदलते रहे किरदार,सियासत नही बदली।।
बस रंग बदलती रही,दीवार कई बार,
जो बारिश मे टपकती है,वो छत नही बदली।
वो दुश्मनी करता तो कोई बात भी होती,
आस्तीन के सांपो ने,अपनी फितरत नही बदली।
उडने की कोशिश मे वो दिन भर का दौडना,
बचपन चला गया ,मगर आदत नही बदली।
आँखो से उसे छूने पर ,मिलता कहाँ सुकून,
हाथो से चाँद छूने की,चाहत नही बदली।
-विजय वर्मा

Tuesday, May 12, 2015

बस उम्र ढलती जा रही है

नियति मेरे साथ कैसी,
 चाल चलती जा रही है  /
बात है कुछ भी नही पर ,
बात बढ़ती जा रही है /
हर पल मेरे उम्मीद की ,
उम्र घटती जा रही है /
है ख्वाहिशें अब भी जवां ,
बस उम्र ढलती जा रही है /
                -विजय वर्मा