Tuesday 16 December 2014

खो गयीं मंजिलें

दूर तक निगाह मे,
कोई न अपने वास्ते।
खो गयीं मंजिलें,
बचें है सिर्फ रास्ते।।
         -विजय वर्मा

3 comments:

  1. ये रास्ते हैं सिर्फ
    मंज़िलों के वास्ते ....

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  2. चंद पंक्तियाँ बहुत कुछ कह रही हैं.

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  3. बहुत खूब ... इन रास्तों से ही मंजिल मिलेगी ...

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