Wednesday, 31 December, 2014

स्वागत नववर्ष तुम्हारा है

स्वागत नववर्ष तुम्हारा है।
तू ही सबकी आँखो मे,
तू ही आँखो का तारा है।

जीत के जश्न मे भी जो पीछे,
खडे है कुछ शरमाये से ।
जिनको सबने नाकारा समझा,
वो खडे है कुछ कतराये से।
जो गाते है पर कंठ मे जिनके,
स्वर है कुछ भर्राये से।
जो बिखर चुके है टूट टूट कर,
और दर्द को है अपनाये से ।

उनको भी मुस्कान मिले,
यह कर्तव्य तुम्हारा है ।

इस ठंडक मे जो बेचारे,
बस सिर्फ कांपते रहते है।
गीली लकडी को सुलगाकर,
जो सिर्फ तापते रहते है।
वो लोग भी तेरे स्वागत मे,
रातो को जागते रहते है।
आँखो मे उम्मीद लिये,
बस तुम्हे ताकते रहते है।

उनको भी कुछ मिले रोशनी,
जिनके चहुदिश अंधियारा है

स्वागत नववर्ष तुम्हारा है
-------विजय वर्मा
०१-०१-२०१५

Tuesday, 16 December, 2014

खो गयीं मंजिलें

दूर तक निगाह मे,
कोई न अपने वास्ते।
खो गयीं मंजिलें,
बचें है सिर्फ रास्ते।।
         -विजय वर्मा

Monday, 7 April, 2014

कुछ कमाल होना चाहिए

क्यों रहे वादे अधूरे ,अब सवाल होना चाहिए /
बात सीधे न बने तो ,बवाल होना चाहिए //
दर्द का परिहास जब ,होने लगे दरबार में:
आँख में आँसू नही तब ,काल होना चाहिए /
देश के ये रहनुमा ,इसको कहाँ ले जायेंगे :
जिनकी फितरत है कि ,मालामाल होना चाहिए /
हर समय ये पीठ अपनी ,थपथपाते रह गये :
अपनी करतूतो पे जिनको ,मलाल होना चाहिए /
किसकी शिकायत हो ,किससे शिकायत हो :
चमन तो उनसे लुटा ,जिन्हे ढाल होना चाहिए /
आँसुओ के संग ,अब सपने कही बह जायें न :
कुछ नया संकल्प ले ,कुछ कमाल होना चाहिए /