Saturday 6 July 2013

मुझे पत्थर बना डाला

   





 मेरी दुश्वारियों ने जब मुझे कमतर बना डाला ,
मेरे जीवन मेंआ करके इसे बेहतर बना डाला /
कोई जादू किया उसने ,या जादू हो गया उससे ,
मुझे होठो से छू करके ,उसने  पत्थर बना डाला //


Tuesday 2 April 2013

इस होली में किस की हो ली

धानी चूनर ओढ़े धरती ,
किस प्रियतम से मिलने आयी ;
बौराने लगे बागो में बृक्ष ,
नव यौवन ने ली अँगडाई ;
ये मादकता मौसम की है ,
फिर मानव कैसे बचे भाई !

जब दिल ने भाव पढ़े दिल के ,
और आँख किसी ने झपकायी ;
न वो हाँ बोली ,न वो ना बोली ,
बस आँख मिली और मुस्कायी ;
ऐसे में किसी को प्यार हुआ ,
ऐसे में किसी की याद आयी /

कुछ अलसाई ,कुछ सकुचाई ,
कुछ शरमाई आँखे  बोली ;
आ प्यार के रंग में रंग जाएँ ,
आ खेलें प्यार भरी होली ,
सच बतलाना मत बहलाना ,
इस होली में किस की हो  ली