Wednesday 19 January 2011


नए वर्ष के स्वागत में हम ,बीते वर्ष को भूल ही गए /नूतन वर्ष के स्वागत में बहुत से गीत बने और गाये गए ,किन्तु किसी ने बीते वर्ष को याद करने की गलती नहीं की /एक कहावत है नया नौ दिन ,पुराना सौ दिन /इसलिए एक छोटी सी रचना समर्पित कर रहा हूँ ,बीते हुए वर्ष को ...

दे के जाने कितने ही सवाल ,
चला गया बीता हुआ साल


आँखों में दहशत ,और मन बहुत बेचैन
डर सा इक समाया है ,दिन हो या रैन
कौन कहाँ हो जाये हलाल
दे के जाने कितने ही सवाल ,
चला गया बीता हुआ साल


बच्चे रोते रोते ,भूखे पेट सो गए
पेट -पीठ पिचक कर ,हैं एक हो गए
और नेता जी के गाल लाल लाल
दे के जाने कितने ही सवाल ,
चला गया बीता हुआ साल


बाप को है चिंता ,कैसे आये यूरिया
बेटा अड़ा जिद पे ,चाही मोबाईल नोकिया
घर में मचा है ,इसी पर बवाल
दे के जाने कितने ही सवाल ,
चला गया बीता हुआ साल


हाथ तो बढे ,मगर वो हाथ न लगी
दिल की लगी ,बनके रह यूँ दिल्लगी
क्या कहें ,है मन में क्या मलाल

दे के जाने कितने ही सवाल ,
चला गया बीता हुआ साल