Saturday, 24 September, 2011

संघर्ष में प्रतिपल रहा हूँ

संघर्ष में प्रतिपल रहा हूँ /
संघर्ष में ही पल रहा हूँ /

वस्त्रहीनो के लिए मै,
ठण्ड में कम्बल रहा हूँ /
दृस्टहीनो के लिए मै ,
राह का संबल रहा हूँ /

ना रहे कोई अकेला ,
मीत बनकर चल रहा हूँ /
रोशनी सबको मिले ,
दीप बनकर जल रहा हूँ /

सोचना मत ,कि पिघलकर ,
व्यर्थ ही ,मै गल रहा हूँ /
देखना तेवर मेरे अब ,
गीत बन कर ढल रहा हूँ /
20-03-1999

Sunday, 14 August, 2011

वीर शहीदों की गौरव गाथा ,गाता रहे तिरंगा










वीर शहीदों की गौरव गाथा ,गाता रहे तिरंगा /

बापू के आदर्शों को ,समझाता रहे तिरंगा /


लहराता रहे तिरंगा ,फहराता रहे तिरंगा /



गोरे अंग्रेज चले गए ,काले अंग्रेज अभी भी हैं ;


गिरगिट सा जो रंग बदलते ,ऐसे रंगरेज अभी भी हैं


इनके मंसूबो को समझें ,नापाक इरादों को जाने


मन की आँखों से इनके ,काले भावों को पहचाने


दाल न इनकी गलने पाए


चाल न इनकी चलने पाए


अमन चैन से रहें सभी ,


अब कहीं न हो फिर दंगा


लहराता रहे तिरंगा ,फहराता रहे तिरंगा



कितने सपूत का लहू बहा ,तब नभ में लाली छायी /

कितनो ने सुख से मुख -मोड़ा ,तब जाके खुशहाली आयी /

कितने फांसी पर झूल गए ,कि जीने का अधिकार मिले /

शोषक -शोषित न रहे कोई ,सबको सबका ही प्यार मिले /

सबके हाथों को काम मिले /

मेहनत का उचित इनाम मिले /

कहीं कोई न मिले कभी ,

भूखा ,प्यासा या नंगा /

लहराता रहे तिरंगा ,फहराता रहे तिरंगा /




















































































































































































Thursday, 17 February, 2011

ऐसे साथी की मुझको ,जरूरत नहीं

सच को सच कहने की ,जिसमे जुर्रत नहीं /
ऐसे साथी की मुझको ,जरूरत नहीं //

मेरी अंगुली कटी ,और मुस्काए वो ,
और कुछ भी हो ये ,पर मोहब्बत नहीं /

भाव दिल के मिले ,तो फिर लग जा गले ,
प्यार करने की कोई ,मुहूर्त नहीं /

Wednesday, 19 January, 2011


नए वर्ष के स्वागत में हम ,बीते वर्ष को भूल ही गए /नूतन वर्ष के स्वागत में बहुत से गीत बने और गाये गए ,किन्तु किसी ने बीते वर्ष को याद करने की गलती नहीं की /एक कहावत है नया नौ दिन ,पुराना सौ दिन /इसलिए एक छोटी सी रचना समर्पित कर रहा हूँ ,बीते हुए वर्ष को ...

दे के जाने कितने ही सवाल ,
चला गया बीता हुआ साल


आँखों में दहशत ,और मन बहुत बेचैन
डर सा इक समाया है ,दिन हो या रैन
कौन कहाँ हो जाये हलाल
दे के जाने कितने ही सवाल ,
चला गया बीता हुआ साल


बच्चे रोते रोते ,भूखे पेट सो गए
पेट -पीठ पिचक कर ,हैं एक हो गए
और नेता जी के गाल लाल लाल
दे के जाने कितने ही सवाल ,
चला गया बीता हुआ साल


बाप को है चिंता ,कैसे आये यूरिया
बेटा अड़ा जिद पे ,चाही मोबाईल नोकिया
घर में मचा है ,इसी पर बवाल
दे के जाने कितने ही सवाल ,
चला गया बीता हुआ साल


हाथ तो बढे ,मगर वो हाथ न लगी
दिल की लगी ,बनके रह यूँ दिल्लगी
क्या कहें ,है मन में क्या मलाल

दे के जाने कितने ही सवाल ,
चला गया बीता हुआ साल