Tuesday 30 November 2010

पहले कभी ना था


ये दिन जितना सुहाना आजकल पहले कभी ना था

ये मौसम आशिकाना आजकल पहले कभी ना था


तेरे आने का असर है या मुझे यूँ ही लगता है

ये दिल जितना दीवाना आजकल पहले कभी ना था

विजय कुमार वर्मा

जुलाई 2009

20 comments:

  1. हर किसी के जीवन में ऐसा पल आता है!!

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  2. तेरे आने का असर है या मुझे यूँ ही लगता है
    ये दिल जितना दीवाना आजकल पहले कभी ना था

    आपने सच कहा है ... ये उनके आने का ही असर है ... इश्क का जादू ऐसे ही चलता है ..

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  3. जूलाई २००९ में जब आपने यह कविता लिखी वर्षा ऋतू का सुहाना मौसम था तथा अब इस समय सुहानी ठण्ड के मौसम में जब पोस्ट किया है -सुहाना ही मौसम है. समयानुकूल रचना है.

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  4. वाह वर्मा जी , बेहद सुन्दर और भावोँ से परिपूर्ण ।

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  5. बहुत सुंदर।।।।। ऐसा ही होता है विजय भाई

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  6. ye uske aane ka asar hi to hai ki dil diwaana ho utha.....bahut khoob!!!

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  7. क्या बात है ..बेहद सुन्दर.

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  8. बहुत खूब..वाह,क्या बात है

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  9. वाह!वाह!.......बहुत खूब भी

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  10. तेरे आने का असर है या मुझे यूँ ही लगता है
    ये दिल जितना दीवाना आजकल पहले कभी ना था

    उनको बता दो भाई अपनी हालत के बारे में
    ताकि वो वो कुछ सोच सके आपके बारे में
    ...बहुत बढ़िया

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  11. वाह बहुत खूब शायरी। शुभकामनायें।

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  12. अच्छी रचना लफ्जो का सुंदर उपयोग !
    मेरे ब्लॉग में SMS की दुनिया .........

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  13. विजय भाई, इस रूमानी कविता को पढकर सचमुच मजा आ गया। बधाई स्‍वीकारें।

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    प्रेत साधने वाले।
    रेसट्रेक मेमोरी रखना चाहेंगे क्‍या?

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  14. बहुत खूब विजय जी...

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