Wednesday, 20 October, 2010

चुनाव आ गया




उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न भागों में चुनाव कार्यक्रम चल रहा है ,इस सन्दर्भ में एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ ;जिसको १९९८ में लिखा था जब मै इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढता था /रचना बहुत पुरानी है लेकिन उम्मीद है आप लोगो को पसंद आयेगी


बदलने लगी रंगत कि ,फिर चुनाव आ गया


नभ से जमी पे ,नेता जी का पांव आ गया




नेता फुदक रहे ,जैसे बरसात के मेढक ,


मौसम में इस तरह का ,बदलाव आ गया




कहता है कौन गावं का ,विकास ठप्प है ,


बाज़ार में लाठी का देखो ,भाव आ गया




जब से हुआ सुधार ,राजनीति के द्वारा ,


गुंडों के आचरण में कुछ ,झुकाव आ गया




फुटपाथियो को फिर फलक का ख्वाब दिखाने,


मदारियों का झुण्ड फिर से गाँव आ गया




जिन बदलो से वर्षा की उम्मीद ,न रहे


दो पल सही ,तपती जमी पर छाँव आ गया


विजय कुमार वर्मा


स्थान -इलाहाबाद


1998