Tuesday 24 August 2010

नया इतिहास बना डालें



आप अगर दें साथ ,नया इतिहास बना डालें
सूनी सूनी आखों में ,विश्वास जगा डालें
जिसके नीचे जाति-धर्म की हवा न चलने पाए ;
प्यार का ऐसा कोई ,नया आकाश बना डालें
घर में रहते है लेकिन ,बेघर से लगते हैं ;
क्यों न ?किसी के दिल को ही ,आवास बना डालें
छावं में पलकों के शायद ,शीतलता होती है ;
बैठ के दो पल ,जीवन की ,हर प्यास बुझा डालें
जाने कब रुक जाये सिलसिला ,चलती साँसो का ;
जीवन के हर पल को ही , मधुमास बना डालें

विजय कुमार वर्मा

27 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ...

    ReplyDelete
  2. bahut khoob!!!! .....jeevan ko madhumaas bana daalen...pyara hai ji!!!

    ReplyDelete
  3. जिसके नीचे जाति-धर्म की हवा न चलने पाए ;
    प्यार का ऐसा कोई ,नया आकाश बना डालें
    घर में रहते है लेकिन ,बेघर से लगते हैं ;
    क्यों न ?किसी के दिल को ही ,आवास बना डालें
    Vijay ji...............badi hi umda baat kahi aapne.

    Ati sunder bhaavpurn rachna.

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर और शानदार रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!

    ReplyDelete
  5. जीवन के हर पल को ही , मधुमास बना डालें..
    ..उम्दा भाव।

    ReplyDelete
  6. Hi..

    Jeevan ke har pal ko madhumas bana daalen...

    Wah Vijay ji...kya baat hai...

    Deepak...

    ReplyDelete
  7. बड़े ही सामयिक विचार, सुलझन की ओर बढ़ते।

    ReplyDelete
  8. bahut badhiya sir...........
    shubhkaamnayein

    ReplyDelete
  9. Behatreen rachana hai, aapne ummide badha di hain

    ReplyDelete
  10. जाने कब रुक जाये सिलसिला ,चलती साँसो का ;
    जीवन के हर पल को ही , मधुमास बना डालें
    Bahut sunder, Vijay jee.

    ReplyDelete
  11. जाने कब रुक जाये सिलसिला ,चलती साँसो का ;
    जीवन के हर पल को ही , मधुमास बना डालें
    वाह बहुत सुन्दर और सार्थक अभिव्यक्ति है। बहुत बहुत बधाई

    ReplyDelete
  12. "घर में रहते है लेकिन ,बेघर से लगते हैं ;
    क्यों न ?किसी के दिल को ही ,आवास बना डालें"

    बहुत बहुत बधाई ...

    ReplyDelete
  13. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..]
    मेरे ब्लॉग पर इज्जताफ्जई का शुक्रिया.

    ReplyDelete
  14. जो करना है कर डालिए। देर मत क‍ीजिए। शुभकामनाएं।

    ReplyDelete
  15. बहुत सुंदर भाव ज़िन्दगी से जुड़े हुए ......!!

    ReplyDelete
  16. जाने कब रुक जाये सिलसिला ,चलती साँसो का ;
    जीवन के हर पल को ही , मधुमास बना डालें ...

    सच है ... बहुत ही आशा भरी है इस संदेश में ... ग़ज़ब का शेर ....

    ReplyDelete
  17. कित्ती प्यारी और भावपूर्ण रचना ...बधाई.
    _____________
    'पाखी की दुनिया' में आपका स्वागत है...

    ReplyDelete
  18. सुन्दर अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  19. बहुत सुन्दर प्रस्तुति .........

    ReplyDelete
  20. ....क्यों न ?किसी के दिल को ही ,आवास बना डालें....

    bahut khoobsurat rachna.

    .

    ReplyDelete
  21. आप अगर दें साथ ,नया इतिहास बना डालें
    सूनी सूनी आखों में ,विश्वास जगा डालें
    जिसके नीचे जाति-धर्म की हवा न चलने पाए ;
    प्यार का ऐसा कोई ,नया आकाश बना डालें
    waah kitne sundar bhav hai man ke .umda

    ReplyDelete
  22. बहुत सुन्दर ....

    ReplyDelete