Saturday 8 May 2010

उचित फैसले ले ले

अभी समय है कुछ उचित फैसले ले ले
कहीं पर दूरियां और कहीं फासले ले ले
युद्ध में प्यार की भाषा को कौन समझेगा
अपने तरकश में कुछ तीर विष घुले ले ले
तोड़ के पंख मेरे इतना क्यों इतराता है
हार तब मानूगा जब मन के हौसले ले ले
विजय कुमार वर्मा
दिसम्बर 2009

2 comments:

  1. Shandar, Jandar, Yadgar aur mera pyar

    Deshvrat Rai

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  2. Dhanyawad Vermaji,
    Bilkul sahi kaha aapney isliye yaha bhi tippnikar nadarad ho gai.

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