Wednesday 26 August 2009

कह नही पाता


ना जब तक देख लू तुमको चैन से रह नही पाता
मै दारिया हूँ मगर मर्जी से अपने बह नही पाता
कैसी उ़लझन में उलझा हूँ भला ये तुम क्या जानोगे
तुम्ही को चाहता हूँ और तुमसे कह नही पाता
विजय कुमार वर्मा
जुलाई 2009

1 comment:

  1. kya kahein sir.....
    kaha bhi naa jaye,kahe bina raha bhi naa jaaye.......mohabbat cheez hi aisi hai!

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