Tuesday 18 August 2009

पहले कभी ना था

ये दिन जितना सुहाना आजकल पहले कभी ना था
ये मौसम आशिकाना आजकल पहले कभी ना था
तेरे आने का असर है या मुझे यूँ ही लगता है
ये दिल जितना दीवाना आजकल पहले कभी ना था
विजय कुमार वर्मा
जुलाई 2009

6 comments:

  1. Sach kaha ..........
    Unke ane pe aa jaatihai jo muh par ronak
    kahte hain beemar ka haal achha hai

    lajawaab likha hai ....... swagat hai aapka

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  2. AAPKI KAVITA KA ASAR HAI YE
    YE BLOG ITNA KHUSHNUMA PAHLE KABHI NA THA.

    ACHCHI RACHNA HAI BHAI. LIKHTE RAHO
    PRATHAM RACHNA KE SAATH AAPKA BLOG JAGAT MEN SWAGAT HAI.
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  3. Bahut Barhia... aapka swagat hai...isi tarah likhte rahiye

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  4. पढ्कर अच्छा लगा.

    आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.

    गुलमोहर का फूल

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  5. बहुत ही प्यारे से अहसास को शब्द दिए हैं. जारी रहें.

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