Saturday 18 July 2009

मेरे लिए

तेरे रस्ते मेरे दिल की तरफ़ जो मुङ गए होते
बादल बेकसी के जाने कब के उङ गए होते
कदम मेरे बंधे थे साथ तेरे चल न पाये ऐ
तुम्हीं मेरे लिए दो पल कहीं पर रूक गए होते
विजय कुमार वर्मा

2 comments:

  1. आप उस मुकाम के तरफ कदम बाधा चुके है ..हमारी दुनिया में आप के इस कदम का स्वागत है ..आप का ब्लॉग अच्छा चल रहा है ..बस ऐसे ही बांये रखे ....वो दिन दूर नहीं जो ...... है

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