Saturday 18 July 2009

कैसा हो गया मेरा गाँव


कैसा हो गया मेरा गाँव
सड़क के मायाजाल में गुम है प्यार की पगडंडी
दिल का दरवाजा बंद किए है मतलब की कुंजी
तेज धुप है गरम हवा है कहीं न दिखता छांव
कैसा हो गया मेरा गाँव
रमई का सिरदर्द यही पानी कैसे रोके
मगरू प्रधान का बहुत ख़ास उसको कैसे टोंके
चला रहे सब एक दूजे पर अपने अपने दाँव
कैसा हो गया मेरा गाँव
पक्के घर हो गए सभी इन्सान हुआ पत्थर
आपस में संबाद नहीं बाकी सब कुछ बेहतर
घायल है मखमली सतह पर जाने क्यों हर पाँव
कैसा हो गया मेरा गाँव
विजय कुमार वर्मा

1 comment:

  1. Vermaji,
    aapki pida sahi hai sabhi jagahon ka yahi bedard hal hai.Aap bilkul satik likhtey hain.aapkey posts padh kar tasalli hui ki satya bolney wale ek aur saheb miley.

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