Tuesday, 29 September, 2009

याद आते है

कभी मुझको हंसातें है कभी मुझको रुलाते है
कभी ये दिल को छू लेते कभी दिल को दुखाते है
मुझे ना याद कर बेशक मगर इतना तो बता दे
तुझे भी क्या कभी बीते हुए दिन याद आते है
विजय कुमार वर्मा
अगस्त २००९

Wednesday, 26 August, 2009

कह नही पाता


ना जब तक देख लू तुमको चैन से रह नही पाता
मै दारिया हूँ मगर मर्जी से अपने बह नही पाता
कैसी उ़लझन में उलझा हूँ भला ये तुम क्या जानोगे
तुम्ही को चाहता हूँ और तुमसे कह नही पाता
विजय कुमार वर्मा
जुलाई 2009

Tuesday, 18 August, 2009

पहले कभी ना था

ये दिन जितना सुहाना आजकल पहले कभी ना था
ये मौसम आशिकाना आजकल पहले कभी ना था
तेरे आने का असर है या मुझे यूँ ही लगता है
ये दिल जितना दीवाना आजकल पहले कभी ना था
विजय कुमार वर्मा
जुलाई 2009

Sunday, 26 July, 2009

कैसे बिसरी

मोरे मन की बतिया सुनके मोहे पागल समझके मत हंस री
तुहका कुछ याद नहीं न सही मोरे मनमीत की ई नगरी
देखब कब तक लईके घुमबो सिर पर मोरे यादन की गठरी
कबहू तो कोइ ठोकर लगिहे जब ई गठरी जाइहे बिखरी
गठरी बिखरी तो कहा मानो जिनगी जहा बा जाई ठहरी
दिनवा के न मनवा में चैन रही रतिया अखिया में बहुत अखरी
भूलल बतिया बहु याद आईहे बतिया जिनमे थी घुली मिसरी
लारिकैयाँ कै यारी बतावा तुही मनवा में से कैइसे बिसरी

Saturday, 18 July, 2009

मेरे लिए

तेरे रस्ते मेरे दिल की तरफ़ जो मुङ गए होते
बादल बेकसी के जाने कब के उङ गए होते
कदम मेरे बंधे थे साथ तेरे चल न पाये ऐ
तुम्हीं मेरे लिए दो पल कहीं पर रूक गए होते
विजय कुमार वर्मा

कैसा हो गया मेरा गाँव


कैसा हो गया मेरा गाँव
सड़क के मायाजाल में गुम है प्यार की पगडंडी
दिल का दरवाजा बंद किए है मतलब की कुंजी
तेज धुप है गरम हवा है कहीं न दिखता छांव
कैसा हो गया मेरा गाँव
रमई का सिरदर्द यही पानी कैसे रोके
मगरू प्रधान का बहुत ख़ास उसको कैसे टोंके
चला रहे सब एक दूजे पर अपने अपने दाँव
कैसा हो गया मेरा गाँव
पक्के घर हो गए सभी इन्सान हुआ पत्थर
आपस में संबाद नहीं बाकी सब कुछ बेहतर
घायल है मखमली सतह पर जाने क्यों हर पाँव
कैसा हो गया मेरा गाँव
विजय कुमार वर्मा

Saturday, 11 July, 2009

गिरने के बाद जो खुद ही संभल सकता है,
वो अपने हाथ की रेखा भी बदल सकता है
हवा की चाल जिसने गौर से महसूस किया
वो ज़माने से बहुत आगे निकल सकता है
आप का मैं ब्लॉग जगत मैं स्वागत करता हु और आशा करता हु की आप हमें विचारो से अवगत कराएँगे